उजाड़ गया है सारा ये तेरे बाद
ख़ामोश हो गया हर एक तेरे बाद
वो रौनक़ें वो महफ़िलें सब खो गईं
उदास बैठा है ये अंजुमन तेरे बाद
मैं ढूँडता हूँ तेरी ख़ुशबू हर तरफ़
पराया हो गया है ये वतन तेरे बाद
कहे ख़ुसरो कि बस इतनी है आरज़ू
लिपटता रहे मुझ से कफ़न तेरे बाद
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उलटी वा की धार
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार
ख़ुसरो रैन सुहाग की जागी पी के संग
तन मोरा मन पी का दोनों भए एक रंग
गोरी सोवे सेज पर मुख पर डारे केस
चल ख़ुसरो घर आपने रैन भई चहुँ देस
ज़िहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियाँ
कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ, न लेहो काहे लगाये छतियाँ
अपनी छब बनाय के जो मैं पी के पास गई
जब छब देखी पी की तो अपनी भूल गई
बहुत कठिन है डगर पनघट की
कैसे मैं भर लाऊँ मधवा से मटकी