सुन तो सही जहान में है तेरा क्या है
कहती है तुझ को ख़ल्क़-ए- ग़ाइबाना क्या है
तू ख़ुद ही सोच ऐ दिल ये इश्क़ का सफ़र है
मंज़िल कहाँ है और ये राह-ए-बेगाना क्या है
वो हुस्न जिस ने मुझ को किया है यूँ बे-ख़ुद
पूछो न मुझ से गर्दिश-ए-पैमाना क्या है
दुनिया समझ रही है जुनून मेरा फ़िज़ूल
उस को ख़बर नहीं कि ये दीवाना क्या है
आतिश तमाम उम्र यूँही मिट के जी लिए
अब क्या बताए इश्क़ का अफ़साना क्या है
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नाज़ व अंदाज़ व अदा में है तरक़्क़ी दा चंद
फ़ित्ना तफ़ली थी क़यामत है जवानी तेरी
कौन से ग़ला का दाना तो ऐ दाना-ए ख़ाल
हम ने अर्ज़ानी में भी पाई गिरानी तेरी
गर्म जोशी से जलाया करे कश्फ़ व ख़िर्मन
बर्क़ हो सकती नहीं शोख़ी में सानी तेरी
जान की तरह से रखता है अज़ीज़ ऐ गुल रो
दाग़ दिल लाला ने समझा है निशानी तेरी
मसर तेग़ है हर मसर मौज़ूँ आतिश
देख ली यार मिरी सीफ़ ज़बानी तेरी
जब के रुस्वा हुए इंकार है सच बात में क्या
ऐ सनम लुत्फ़ है पर्दे की मुलाक़ात में क्या