Modern · 1837–1914 · पानीपत – पानीपत
पानीपत के अल्ताफ़ हुसैन हाली ने ग़ालिब से तालीम पाई और फिर सजावटी रिवायत से अलग राह ली — उनकी "मुसद्दस-ए-हाली" (1879) ने शायरी को सुधार का औज़ार बनाया। उनका "मुक़द्दमा-ए-शेर-ओ-शायरी" जदीद उर्दू आलोचना की बुनियाद है, और ग़ालिब तथा सर सैयद की उनकी लिखी सवानेह आज भी बुनियादी किताबें हैं।
कोई शाइर नहीं मिला।