उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं
बाइस-ए-तर्क-ए-मुलाक़ात बताते भी नहीं
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
दिल्ली में जन्मे ग़ज़ल शायर, अपनी सरलता, प्रवाह और मुहावरेदार उर्दू के लिए विख्यात।
और पढ़ेंResponses
No comments yet. Be the first to respond.
कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं
बहुत आगे गए बाक़ी जो हैं तैयार बैठे हैं