ज़िहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियाँकि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ, न लेहो काहे लगाये छतियाँअमीर ख़ुसरो