हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
उर्दू के महान व्यंग्यकार, जिन्होंने औपनिवेशिक आधुनिकता और बदलते समाज पर हास्य-व्यंग्य किया।
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आतिश कदा है सीना मिरा राज़ निहाँ से
ऐ वाए अगर मरज़ इज़हार में आवे
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले