इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
ग़म के शायर, जिनकी ग़ज़लें पीड़ा को ही एक प्रकार का संगीत बना देती हैं।
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यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से कौन डरता है
मगर क्या कीजिये ग़म-ए-ज़िंदगी तो बस यही है