हर हाथ में एक रौशन सा शफ़्फ़ाफ़ सा आईना है
मगर कोई किसी की आँखों में नहीं देखता
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
स्क्रीन की रोशनी वाली रात के एक काल्पनिक युवा समकालीन शायर — मूल मीरास कलाम।
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