चाँद के लिए बीस शेर — हर मिज़ाज में चाँद।
वो चाँद सी सूरत मेरी रातों में उतर आए
मैं नींद से जाग उठूँ तो बस उसका ख़याल आए
रात का चाँद भी तन्हा है मिरे जैसा ही
आसमानों में भी होगा कोई जुदाई का असर
शब को मेरे सामने उस ने चराग़ को बुझा दिया
और कहा कि चाँद है दिल को तसल्ली हो गई
रात के इस पार भी एक रात मेरी मुंतज़िर है
दो मुल्कों के दरमियान मेरा चाँद बँटा हुआ है