ऐ ज़ौक़ तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासर
आराम में है ख़िदमत-ए-आक़ा न करो तुम
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अंतिम मुग़ल दरबार के राजकवि और बहादुर शाह ज़फ़र के उस्ताद।
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