दर्द-ए-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान को
वर्ना ताअत के लिए कुछ कम न थे करर्-ओ-बयाँ
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
सूफ़ी संत और अठारहवीं सदी की उर्दू ग़ज़ल के तीन स्तंभों में से एक।
Responses
No comments yet. Be the first to respond.