सरसरी तुम जहान से गुज़रे
वर्ना हर जा जहान-ए-दीगर था
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अठारहवीं सदी के क़सीदा और व्यंग्य के उस्ताद, शास्त्रीय उर्दू शायरी के स्तंभ।
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