कितना है बद- ज़फ़र दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अंतिम मुग़ल बादशाह और कोमल ग़ज़ल शायर, जिनके कलाम में मिटती दुनिया की टीस है।
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अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे
मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे
तोहमतें चंद अपने ज़िम्मे धर चले
जिस लिए आए थे सो हम कर चले