तोहमतें चंद अपने ज़िम्मे धर चले
जिस लिए आए थे सो हम कर चले
दिखाई दिए यूँ कि बेख़ुद किया
हमें आप से भी जुदा कर चले
कितना है बद-नसीब ज़फ़र दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में