इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
उर्दू के महान व्यंग्यकार, जिन्होंने औपनिवेशिक आधुनिकता और बदलते समाज पर हास्य-व्यंग्य किया।
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