है आज वो ही जलवा-ए-हुस्न-ए-अज़ल मगर
अब देखने को आँख नहीं बे-नक़ाब है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
गोंडा के सूफ़ी शायर, जिन्होंने ग़ज़ल को रहस्यमय प्रेम का पात्र बनाया।
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