गुल-ए-उमीद खिला है दिल-ए-वीरान में
कोई आए न आए मगर बहार तो है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
उर्दू के कश्मीरी-हिन्दू उस्ताद, जिनकी देशभक्ति की नज़्मों ने एक पीढ़ी को जगाया।
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