अब इस के बाद सुबह है और सुबह-ए-नौ मजाज़
हम पर है ख़त्म शाम-ए-ग़रीबान-ए-लखनऊ
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
प्रगतिशील आंदोलन के रूमानी-क्रांतिकारी — "उर्दू के कीट्स"।
Responses
No comments yet. Be the first to respond.