ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँ
आज फिर दिल ने मचाया है महल क्या करूँ
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
प्रगतिशील आंदोलन के रूमानी-क्रांतिकारी — "उर्दू के कीट्स"।
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