इंसान को बेदार तो हो लेने दो हर क़ौम
पुकारेगी हमारे हैं मजाज़ और हमारे थे
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
प्रगतिशील आंदोलन के रूमानी-क्रांतिकारी — "उर्दू के कीट्स"।
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