हर सुबह एक नई उमीद ले के आती है
थक के बैठा हूँ मगर हारा नहीं हूँ मैं
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
खुली राह के एक काल्पनिक समकालीन शायर — रोज़मर्रा पर मूल मीरास कलाम।
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