तिरे ग़ुरूर का हलीह बगाड़ डालों गा
में आज तेरा गरेबान फाड़ डालों गा
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अमरोहा और कराची के बाग़ी शायर, अपनी मायूस शोख़ी और गुफ़्तगू-जैसी ग़ज़लों के लिए महबूब।
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