ये तय क्या है कि दरिया मौज मस्ती को
सराब दश्त तपीदा में गाड़ डालों गा
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अमरोहा और कराची के बाग़ी शायर, अपनी मायूस शोख़ी और गुफ़्तगू-जैसी ग़ज़लों के लिए महबूब।
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