जा के सुनूँ आसार में सायीं सायीं शाख़ों की
ख़ाली महल के बरजों से बर्क़ व बाद करूँ
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अजीब धुंधलकों और देर से आए पछतावों के शायर — "हमेशा देर कर देता हूँ मैं" — उर्दू और पंजाबी दोनों में।
और पढ़ेंResponses
No comments yet. Be the first to respond.