देखे हैं वो नगर कि अभी तक हूँ में
वो सूरतें मिली हैं कि जाए आदमी
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अजीब धुंधलकों और देर से आए पछतावों के शायर — "हमेशा देर कर देता हूँ मैं" — उर्दू और पंजाबी दोनों में।
और पढ़ेंResponses
No comments yet. Be the first to respond.