फ़नदक़ीं बज़्म में देख उस के सर अनगशतों से
रिश्ता-ए रब्त ने ली राह कफ़ दसतों से
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
आगरा के जनकवि, जिन्होंने मेले, त्योहार और आम ज़िंदगी को उर्दू नज़्म में उतारा।
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