दुआ सलाम ज़रूरी है शहर वालों से
मगर अकेले में अपना भी अहतराम करो
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
दोहों और ग़ज़लों के शायर, जिनकी ज़बान बोलती हुई हिंदुस्तानी है — नर्म, सेक्युलर और चुपके से बाग़ी।
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