हमेशा अम्न नहीं होता फ़ाख़ताؤं में
कभी कभार अक़ाबों से भी कलाम करो
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
दोहों और ग़ज़लों के शायर, जिनकी ज़बान बोलती हुई हिंदुस्तानी है — नर्म, सेक्युलर और चुपके से बाग़ी।
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