कहीं रहे वो मगर ख़ैरियत के साथ रहे
उठाए हाथ तो याद एक ही दुआ आई
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
जदीद उर्दू ग़ज़ल की अग्रणी स्त्री-आवाज़, जिन्होंने मोहब्बत और औरत के मन को बेबाकी से लिखा।
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