कभी तन्हाई से महरूम न रक्खा मुझ को
दोस्त हमदरद रहे कितने मिरी ज़ात के साथ
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
जदीद उर्दू ग़ज़ल की अग्रणी स्त्री-आवाज़, जिन्होंने मोहब्बत और औरत के मन को बेबाकी से लिखा।
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