ब्वालहोस सोज़ दिल कूँ क्या जाने
न जले हरगिज़ आग में अबरक
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
दक्कन के सूफ़ी शायर, जिनकी वज्द भरी ग़ज़लें उर्दू रिवायत के सरचश्मे पर खड़ी हैं।
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