गरने की तरह का न सँभलने की तरह का
सारा वो सफ़र ख़्वाब में चलने की तरह का
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
जदीद ग़ज़ल के बेचैन प्रयोगधर्मी, छह दशकों से उसकी ज़बान और क़वाइद को नए साँचों में ढालते हुए।
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