हनरोरान हिन्द
इश्क़ तीनत में फ़रोमाईह नहीं मिस्ल हवस
बे जरात रिंदाना हर इश्क़ है रोबाही
मसवद मरहूम
गर्म हो जाता है जब महकोम क़ोमों का लहू
इश्क़ से पैदा नवा ज़िंदगी में ज़ेर व बम
कोह के हूँ बार ख़ातिर गर सदा हो जाइए
हुजूम नाला हैरत आजिज़ अर्ज़ यक अफ़ग़ां है
कारगाह हस्ती में लाला दाग़ सामाँ है
शम्अ व परवाना
शम्अ
दिल
बलाल
अनोखी वज़्अ है सारे ज़माने से निराले हैं
ज़ाहिर की आँख से न तमाशा करे कोई
पिया म
स्वामी राम तीर थ
तलबह अली गढ़ कॉलेज के नाम
हुस्न व इश्क़
की गोद में बली देख कर