सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी के इम्तिहान और भी हैं
तही से नहीं ये फ़ज़ाएँ
यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं
क़नाअत न कर आलम-ए-रंग-ओ-बू पर
चमन और भी आशियाँ और भी हैं
अगर खो गया इक नशेमन तो क्या ग़म
मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ और भी हैं
तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरा
तेरे सामने आसमान और भी हैं
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहान और भी हैं
तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरा
तेरे सामने आसमान और भी हैं
खोल आँख ज़मीन देख फ़लक देख फ़ज़ा देख
मशरिक़ से उभरते हुए सूरज को ज़रा देख
नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर
तू शाहीन है बसेरा कर पहाड़ों की चट्टानों में
मोहब्बत मुझे उन जवानों से है
सितारों पे जो डालते हैं कमंद