ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर से पहले
बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है
इक़बाल ने ग़ालिब को गहराई से पढ़ा — गूँज सुनिए।