शहर की और मैं नाशाद-ओ-नाकारा फिरूँ
जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूँ
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
प्रगतिशील आंदोलन के रूमानी-क्रांतिकारी — "उर्दू के कीट्स"।
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नींद आँखों से रूठ के कहीं चली गई है
और मैं हूँ ये रात है और एक जलती स्क्रीन है