नींद आँखों से रूठ के कहीं चली गई है
और मैं हूँ ये रात है और एक जलती स्क्रीन है
शहर की रात और मैं नाशाद-ओ-नाकारा फिरूँ
जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूँ