मैं अपना शहर छोड़ आई पर शहर न छोड़ सका मुझे
हर ख़्वाब में वही गली वही घर वही दर होता है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
शहरी भोर की एक काल्पनिक समकालीन शायरा — स्मृति और प्रवास पर मूल मीरास कलाम।
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