छतों पे उतरती है जब पहली किरण सहर की
तो शहर की हर खिड़की में एक चराग़ सा जलता है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
शहरी भोर की एक काल्पनिक समकालीन शायरा — स्मृति और प्रवास पर मूल मीरास कलाम।
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