दूर से देखती हूँ तो मशरिक़ और भी रौशन लगता है
शायद दूरी ही मोहब्बत का असली रंग दिखाती है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
निर्वासन और पूरब की एक काल्पनिक समकालीन शायरा — सम्बद्धता पर मूल मीरास कलाम।
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