आँखों से रूठ के कहीं चली गई है
और मैं हूँ ये है और एक जलती स्क्रीन है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
स्क्रीन की रोशनी वाली रात के एक काल्पनिक युवा समकालीन शायर — मूल मीरास कलाम।
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शहर की रात और मैं नाशाद-ओ-नाकारा फिरूँ
जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूँ