दयार मग़रिब के रहने वालो की बस्ती दुकाँ नहीं है
खरा जिसे तुम समझ रहे हो वो अब ज़र अय्यार होगा
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
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