सनम कदा है जहाँ और मर्द हक़ है ख़लील
ये नुक्ता वो है कि पोशीदा ला इलाह में है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
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