हल्क़ा-ए सूफ़ी में बे नम व बे सोज़ व साज़
में भी रहा तिश्ना तो भी रहा तिश्ना काम
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
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