शहर कितना जो कोई उन में सरिश्क अफ़्शाँ हो
रो कश गिर्या-ए ग़म हौसला-ए हामों है
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
अठारहवीं सदी के अग्रणी उर्दू शायर, जिन्हें "ख़ुदा-ए-सुख़न" कहा जाता है।
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