जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी
उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो
पृष्ठभूमि
शायर के बारे में
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
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नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है