उमीद — वह छोटी, ज़िद्दी रौशनी जो हर सहर लौट आती है।
जुदाई की लंबी टीस, चार सदियों की आवाज़ों में।
इंतज़ार — प्रतीक्षा की टीस, ज़फ़र से आज तक।
तन्हाई — एक कमरे में, भीड़ में, एक सदी में अकेला होना।