वे शेर जहाँ महबूब का इश्क़ ख़ुदा का इश्क़ बन जाता है।
मय, साक़ी और मयख़ाना — जहाँ नशा अंतर्दृष्टि बन जाता है।
दिल के नक़्शे — उसके शहर, खंडहर और शांत कमरे।
जागती घड़ियाँ, चाँद, और वह शहर जो सोता नहीं।