साथ रखने के लिए बीस शेर — एक बैठक में ग़ालिब के दीवान का सार।
बीस शेरों में ख़ुदा-ए-सुख़न — मीर अपनी सबसे गहरी और सादा सूरत में।
ख़ुदी और आग के बीस शेर — रूह को उठने की पुकार देते इक़बाल।
चुटीलेपन और अदा के बीस शेर — वह सहज दिलकशी जिसने दाग़ को महबूब बनाया।
वे बीस शेर जिन पर उर्दू शायरी इश्क़ की बात करते हुए बार-बार लौटती है।
दर्द और सहन के बीस शेर — दर्द का निचोड़।
जीने पर बीस शेर — ज़िंदगी को तौलते, आज़माते, निहारते।
चाँद के लिए बीस शेर — हर मिज़ाज में चाँद।