Classical · 1797–1869
मुग़ल काल के अंतिम दौर के महान उर्दू और फ़ारसी शायर, अपनी ग़ज़लों के लिए विख्यात।
और पढ़ेंClassical · 1877–1938
कवि-दार्शनिक, जिनकी उर्दू और फ़ारसी शायरी ने आध्यात्म को आत्म-बोध की दृष्टि से जोड़ा।
और पढ़ेंClassical · 1253–1325
उर्दू/हिन्दवी कविता के जनक — तेरहवीं सदी के बहुश्रुत कवि जिन्होंने फ़ारसी और दिल्ली की बोली को गीत में पिरोया।
और पढ़ेंClassical · 1723–1810
अठारहवीं सदी के अग्रणी उर्दू शायर, जिन्हें "ख़ुदा-ए-सुख़न" कहा जाता है।
और पढ़ेंClassical · 1789–1854
अंतिम मुग़ल दरबार के राजकवि और बहादुर शाह ज़फ़र के उस्ताद।
और पढ़ेंClassical · 1800–1851
दिल्ली के ग़ज़ल शायर, अपनी अंतरंग और रूमानी शायरी के लिए प्रसिद्ध।
और पढ़ेंClassical · 1721–1785
सूफ़ी संत और अठारहवीं सदी की उर्दू ग़ज़ल के तीन स्तंभों में से एक।
और पढ़ेंClassical · 1735–1830
आगरा के जनकवि, जिन्होंने मेले, त्योहार और आम ज़िंदगी को उर्दू नज़्म में उतारा।
और पढ़ेंClassical · 1775–1862
अंतिम मुग़ल बादशाह और कोमल ग़ज़ल शायर, जिनके कलाम में मिटती दुनिया की टीस है।
और पढ़ेंClassical · 1713–1781
अठारहवीं सदी के क़सीदा और व्यंग्य के उस्ताद, शास्त्रीय उर्दू शायरी के स्तंभ।
और पढ़ेंClassical · 1667–1707
"उर्दू शायरी के पिता", जिनके दकनी दीवान ने ग़ज़ल को इस भाषा में स्थापित किया।
और पढ़ेंClassical · 1831–1905
दिल्ली में जन्मे ग़ज़ल शायर, अपनी सरलता, प्रवाह और मुहावरेदार उर्दू के लिए विख्यात।
और पढ़ेंClassical · 1756–1817
लखनऊ दरबार के बहुमुखी शायर और भाषाविद, अपनी हाज़िरजवाबी और शब्द-क्रीड़ा के लिए प्रसिद्ध।
और पढ़ेंClassical · 1747–1824
दिल्ली और लखनऊ शैलियों के बीच की कड़ी, जिन्हें भाषा को सबसे पहले "उर्दू" नाम देने का श्रेय है।
और पढ़ेंClassical · 1778–1847
लखनऊ शैली के संस्थापक उस्ताद, जिनकी ग़ज़लें शिल्प को फ़क़ीराना विरक्ति से जोड़ती हैं।
और पढ़ेंClassical · 1776–1838
लखनऊ शैली के सह-संस्थापक, जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल की भाषा को परिष्कृत और मँजवाया।
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